डालते ही झड़ गए सब, टिका न कोई भी फूल गले में मेरे हार के;
दर्द उनको हुआ तो निकाल लिया मैंने, काँटा जो चुभा पैरों में सरकार के;
चीख उठे, चिल्ला उठे, कहने लगे मत लो मेरी;
एक ही चप्पल है और ऊपर से दिन भी हैं त्यौहार के।
डालते ही झड़ गए सब, टिका न कोई भी फूल गले में मेरे हार के;
दर्द उनको हुआ तो निकाल लिया मैंने, काँटा जो चुभा पैरों में सरकार के;
चीख उठे, चिल्ला उठे, कहने लगे मत लो मेरी;
एक ही चप्पल है और ऊपर से दिन भी हैं त्यौहार के।
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